इक लम्हा!!!!!(poem)

इक लम्हा!!!!!



इक लम्हा गिर गया दामन से
जब मै थोड़ी सेहमोसि थी यादो में
निगाहो में नमी तो थी 
शायद इस लिए खो बैठी 


वो एक लम्हा बचपन का
हँसी की किंकरिया अभीभी
गूंजती है गाँव की गलियों में
नदी के किनरोपर भीगा बचपन
और एक सहली भी राह देख रही है शायद

ये सब और कही सारी बातें थी
समेट रखी थी दामन में
क्या पता कहा लापता हो गया
मेरा वो एक लम्हा
कही बह तो नहीं गया
आखो की नमी के साथ
या शायद जिंदगी जीने की दौड़ में


-शीतल

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